कल्पनाशब्दों के बीच
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वो जानता था मिलना मुझे व्यर्थ कर देगा बस इसलिए उसने खुद को…

वो जानता था मिलना मुझे व्यर्थ कर देगा बस इसलिए उसने खुद को मेरे लिए रिक्त रखा । धीरे धीरे मैंने जाना कि अभाव ही प्रेम है । अभाव ही स्त्रोत है भाव का। अतिरिक्त *अ* प्रेम में अनुच्चरित रहता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें