भाषा / Language
एक सिवा तेरे ,कोई तो आसमान नहीं
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एक सिवा तेरे ,कोई तो आसमान नहीं
ये छत , और तू जीने का सामान सही
संवर मत ,चली आ ,यूँ अभी इसी तरह
इश्क़ में ,ढ़ेर रुबाई का अरमान नहीं
सूखी स्याही भी देती जाएगी गवाही
ये कलम है मेरी , गीली ज़ुबान नहीं
लौट कर पोंछता जा पैरों के निशान
देह मंदिर है ,तेरी वाली दुकान नहीं
दबा के देख ले अना वाला बुलबुला
इस फेर ,कटार हूँ ,बासी उफ़ान नहीं
राख से पीतल ,पीतल से सोना चमका
इस कहानी को दोहराना आसान नहीं
कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें