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रचना 4507

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बेशक लोग आपको जादुई कहें

बेशक लोग आपको जादुई कहें.... पर हम क्या हैं ये केवल हम जानते हैं और अपने जादू पर चेक का निशान लगाना आसान नहीं। होंठ कांपते हैं खुद से झूठ बोलते सुनते हुए। उंगलियां मुकर जाती हैं ....खुद अपना ही नाम लिखने के लिए ।अगर जादू खोखला दिखे एकांत में खुद को.... तो फिजूल हो तुम। अकेले में ईश्वर से आंख मिलाने की हिम्मत होनी चाहिए। उसको चला ले जाना ... उसपर अपना जादू चलाना आसान नहीं। अगर कर पा रहे उस पर भी सम्ममोहन तो सच्चे हो तुम ।जिंदा हो तुम। रात की नींद और सुबह की हंसी मुबारक। ईश्वर संग रहता है तो चमक आ ही जाती है खुद पर। यही जादू है जिसपर लोग डोल जाते हैं। तुम्हारे हो जाते हैं। * तुम्हारे न होने से फ़र्क तो है ... और जब पड़ता है तो फ़र्क दिखता भी है। लगता भी है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें