भाषा / Language
सुर तो सात ही हैं
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सुर तो सात ही हैं...
आठवां इश्क़ का तो बस लग जाता है।
*आईने में चेहरा नहीं....
चेहरे पर आईना होना चाहिए।
कोई देखे तुम्हें तो बस देखता रहे ....
खुद को।
😊😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें