भाषा / Language
भव्या का कहना है कि मां इन चार सालों में सब कितना महंगा हो…
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भव्या का कहना है कि मां इन चार सालों में सब कितना महंगा हो गया। हज़ार रुपए तो दो जूस दो प्लेट मोमोज एक बिरयानी में खत्म हो जाते।
ऑटो वालों ने भी किराया तीस चालीस रुपए बढ़ा दिया है। मैंने कहा तेरे दिमाग में डॉलर और रुपए की भिड़ंत चल रही होगी। जब अपना कमाने लगो तो लगता है पैसे पर्स में छप भी रहे और वहीं से टप भी रहे।
Chill maar
कहानी का सार ये है कि बिटिया कंजूस हो गई है। खर्च करने से पहले सोचने लगी है। बच्चे जब वैल्यू ऑफ मनी एंड वैल्यू ऑफ थिंग्स समझने और कंपेयर करने लगे तो समझो ....
जिंदगी तोल मोल करना सीख गए।
भव्या ने कल एक बहुत शानदार बात कही...I don't invest on things I invest on people .I invest on pure relations and genuine mindsets.
I love to earn souls. एक दो ऐसे रिश्ते जरूर हों जहां बस ट्रस्ट हो ।प्रश्न और misunderstandings की जगह ही न हो।
*तस्वीर शाम को मैंने ली उसके दोस्त संग घूमने जाने से ठीक पहले।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें