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जब आप मायने नहीं रखते तो वो दिखने लगता है

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जब आप मायने नहीं रखते तो वो दिखने लगता है.... फिर कुछ भी सुनने से फ़र्क नहीं पड़ता। अनुपस्थिति ही चरम उपस्थिति है। तुम्हारे लिए दिल पीठ पर रख लिया है। *दुखाने से बहुत आसान था मेरा दुख बन जाना । मेरा हो जाना।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें