कल्पनाशब्दों के बीच
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तुम्हें वारिस कहा

तुम्हें वारिस कहा... अपने दुख का अपनी चाहना का। *मैंनु इश्क़ तेरा लै डूबा हाँ इश्क़ तेरा लै डूबा *घर लौट रही .....हेडफोन में ये गाना बज रहा ।कार सरपट दिल्ली की तरफ दौड़ रही। कोई याद है पर ....पीठ फेर कर खड़ी है । जादू होता ही नहीं अब।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें