कल्पनाशब्दों के बीच
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अभी अभी इनबॉक्स में Sarika Moondra ji का प्यार मिला। @कल्प…

अभी अभी इनबॉक्स में Sarika Moondra ji का प्यार मिला। @कल्पना लाइव इतने सालों के बाद भी आप सब का प्यार पाती है। बहुत बहुत आभार आपका। ' @ कल्पना लाइव ‘ खुबसूरत एहसासों से बुना गया काव्य –संग्रह हैं | लेखिका की कल्पनाओं से सजा शब्दों का आलोक जीवन के प्रति अथाह विश्वास से भरा हुआ है | जिनमें काश और आह की दस्तक भी है , मगर फिर स्वयं पर विश्वास भी ..........| पहली ही कविता की पंक्तियाँ कितने विश्वास से सराबोर हैं ......... खूबसूरत नहीं हूँ मैं हाँ ...........अद्भुत जरुर हूँ ............................................ ज्यादातर लोग सादगी मुडकर देखते नहीं पर अद्भुत को अकसर रुक कर सुनते हैं .......... इसी प्रकार एक ओर कविता ‘मैं अपने साए में खड़ी हूँ ‘ स्त्री द्वारा स्वयं के लिए आसमान रचने की कविता है | आपकी कविताओं में यथार्थ का स्वीकार्य भी है और कल्पना लोक की प्रत्तिती भी | यथार्थ के परिवेश को बुनती कवितायें शहर , पीले पड़ते रिश्ते , एक बार सुन भर लो आदि बहुत गहराई से अपनी बात रखती है | ‘एक बार सुन भर लो’ एक ऐसी ही कविता है जिसमें संवेदनहीन दुनिया से आपकी ये उम्मीद कि एक बार सुन लेने से शायद कहीं तो कुछ बदल जाएगा | कुछ कवितायें बहुत हल्की-फुलकी , प्यारी सी ..........’शब्दों की कॉलोनी ‘ , सोशल मीडिया पर लेखकों का जमावड़ा, मुझे भी बहुत कुछ याद दिलाया इस कविता ने जब यहाँ लिखना शुरू किया ही था | क्या ही कहूँ सबमें कुछ सुकून भरा देखती आपकी नजर के लिए ..........बस यही कि काश जैसा सोचा है आपने वैसा ही हो कॉलोनी का हर घर , हर बन्दा ! कितनी दूरियों पर बैठे हम जुड़ जाते हैं शब्दों से , कुछ ऐसे ही तो जुड़े हम भी ............सच ही है अदृश्य शब्दों से बंधे हम सब कभी दूर, कभी पास पर ..........जाने कैसे सब एक जैसे ......आस पास और सच कितने एक जैसे शीर्षक मिल जाते हैं हमारी कुछ रचनाओं के ...........जायका , खिड़कियाँ , शब्द , काश ..........आदि | अमृता जी के माध्यम से बड़ी गहन बात आपने रखी है कि जो सहज है वही सबसे कठिन | जैसे कल्पना करना सहज है और रंग भरना कठिन | यूँ तो हर कविता का अपना एक रंग हैं , अपना एक तिलिस्म है, अपनी एक कल्पना है और ये कल्पना किसी ओर से कुछ नहीं मांगती बस स्वयं के भीतर स्वयं को टटोलती जाती है और यथार्थ की जमीं पर अपनी कल्पना को सार्थक होते देख मुस्कुराती है | सारिका आशुतोष मूंदड़ा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें