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किताबें लिख लेना या किताबें पढ़ लेना कोई सर्टिफिकेट नहीं कि…

किताबें लिख लेना या किताबें पढ़ लेना कोई सर्टिफिकेट नहीं कि आप एक अद्भुत इंसान हैं । आप क्या हैं इसका प्रमाण सिर्फ़ ईश्वर के पास है और हर उस इंसान के पास जिसे आपने दुखाया या हंसाया है। व्यवहार तय करता है आपका उत्कृष्ट होना। आपका एकांत अगर आपको कचोटता नहीं तो समझ लीजिए आप एक सुंदर किताब रोज़ थोड़ी थोड़ी लिख रहे। वही मायने देगी तुमको। किताब लिखने पढ़ने का अच्छे होने से कोई लेना देना नहीं। आपका अच्छा होना ही असल में अच्छा होना है। खालिस और खाली में अंतर किताब में नहीं रूह में मिलेगा। रूह पढ़िए। रूह लिखिए।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें