ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4411

भाषा / Language

नीली कमीज़ में उसकी तस्वीर देख कर लड़की ने डायरी में लिखा

✦
नीली कमीज़ में उसकी तस्वीर देख कर लड़की ने डायरी में लिखा.... आसमान को देह पहनते देखा आज । मन था कि तुम्हारी कमीज़ की जेब में चांद बनकर छिप जाऊं ।जहां भर से दूर ।बस खो जाऊं कहीं दूर। दूर किसी शहर में अचानक धुली नीली कमीज़ पर हाथ रखते ही लड़के को महसूस हुआ कि उसकी जेब में कुछ कागज़ धुल गए हैं । कमीज़ सूखी है पर जेब अब तक गीली है। उसने गीले टुकड़ों को सलीके से मेज़ पर रखा और मुस्कुरा कर उन पर उंगलियों से एक अक्षर उकेर दिया । कागज़ के चारों तरफ अचानक एक सफेद याद का घेरा बन गया। लड़की का नाम क्या था ...पता नहीं ? लड़के की याद क्या थी ... पता नहीं? पर इतना दावे के साथ कह सकती हूं कि आपको अपनी नीली कमीज़ याद आई । खाली जेब में रखी टटोल याद आई। और मुझे? मुझे आपका स्पर्श महसूस हुआ .... उस एक अक्षर की दाब उभर आई मुझमें... ऐसा मैंने नहीं चांद ने मेरे कानों में कहा।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें