कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4404

भाषा / Language

प्रेम में संग चलते हुए तुमने सिखाया

प्रेम में संग चलते हुए तुमने सिखाया कि किसी के पास जाने या दूर जाने से प्रेम को मापा नहीं जा सकता। अपनी जगह रुकने से ... बस वहीं डूब जाने से प्रेम जिंदा रहता है। तुम कहां संग हो अभी मैं भी कहां हूं तुम्हारे साथ पर हम हैं। इस *हैं *पर उड़ रही हमारी प्रेम पताका रश्मि मैं ....रथ तुम
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें