कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4403

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जानती हूं... वो नज़र अब भी मुझे छुप कर देखती है।

जानती हूं... वो नज़र अब भी मुझे छुप कर देखती है। कभी मैं पूछती थी.... अब मेरी तस्वीर पूछती है... कैसे हैं आप? खुश तो हैं ना?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें