भाषा / Language
धुंध और घाम की लवस्टोरी
✦
धुंध और घाम की लवस्टोरी....
लोग कहते हैं पहाड़ी लडकियाँ सुन्दर होती है। वो कहती पहाड़ी लडकियाँ *बस* होती हैं। सुंदरता उन पर उनके नाम के आगे लगे "पहाड़" शब्द की रिसती रहती है। वहां की लड़कियां सोखती रहती हैं पहाड़ के दुख, उनकी बेबसी, उनकी गिरहें और एक लंबी चुप।
नैना को खुद में नदी और पेड़ उगा लेने की जिद्द थी। शायद इसी लिए वो पहाड़ों से खुद को ज्यादा relate कर पाती थी।
शहर की भागती दौड़ती दुनिया से उड़कर वो अक्सर अपने "Pause" के पास पहुँच जाती ।
She was never mesmerised by beauty of mountains she was in love with the essence of being mountains.
वो पहाड़ों के जोग को समझना चाहती थी। जब हर कोई कहीं जाना , आना, पहुंचना चाहता है ....पहाड़ कैसे बरसों से एक ही जगह पर थमे हैं...ये बात उसे सोच से भर देती थी।एक जैसी ही बर्फ, धुंध, धाम और टेढ़े मेढ़े रास्तों से भला कौन बहल सकता है ताउम्र? इस प्रश्न का उत्तर नैना की डायरी को कभी नहीं मिला।
उसे लगता हर चीड़ के पेड़ के नीचे एक आर्द्र कहानी और हर देवदार पर कुछ शोख कविताऐं टंगी है। उनके बीच के संवाद की ब्रेल और चुप को decode होना अभी बाकी है।
Naina एक तलाश लिए फिरती रहती। बूढ़े पहाड़ों पर वो एक संजीदा पर Mysterious अय्यार ढूंढ लेती। वो खुद हिसाब में कच्ची थी तो उसे पहाड़ अपना replica लगते।
पहाड़ कभी नहीं रखते कोई हिसाब कब आओगे, कितने दिन रुकोगे ? कब जाओगे ? क्यों आए?
वो कहते हैं ना...
फिदा हुए लोगों को क्या निराश करना ? आ गए तो आ गए। प्रेम में पड़ कर प्रश्न क्यों पूछना? और क्या पूछना ?
नैना ऐसे ही किसी किरदार को अपनी जिंदगी से जोड़ना चाहती थी।
लोगों के लिए होते होंगे पहाड़ कोई चीज़, कोई जगह ....पर उसके लिए वो Personified थे ।उम्र के सत्ताईसवें पड़ाव पर पहुँचकर Naina की खुद के लिए checklist काफी short और Specific थी। उसे पता था उसे क्या नहीं चाहिए |
वो ढूंढ लेना चाहती थी एक जगह ....एक वजह जहाँ पहाड़ हुआ सके | अपने जैसे किसी से जुड़ा जा सके।
वो तलाश रही थी एक खास रूह को....
RV ...The famous storyteller.
She was fascinated by his charisma. उसे लगता था वो पहाड़ों में ही उसे मिलेगा।
शायद इस बार उससे मिलकर वो धुंध और धाम की लवस्टोरी पूरी लिख ले।
नैना ने डायरी में आज की तारीख डाली
और लिखा
RV stay there ... Naina आ रही।
क्रमशः
*घाम.... माने धूप
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें