भाषा / Language
बातों के सिल सिले टूटे हैं ।
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बातों के सिल सिले टूटे हैं ।
ना आप हमसे गए ...
ना हम आपसे रूठे हैं ।
*मोहब्बत के मौसम खामोशी से बने और चुप्पी में बीत गए।
चुटकी भर सफेद बसंत झर झर गिरता रहा
बारहमासी प्रेम लुप्त होता रहा
मान मेरा कहा....
पतझर ने लिखे सबसे शोख प्रेम पत्र
हर उस प्रेमिका के लिए
जिसके हिस्से आया
निष्ठुर प्रेमी
लौटाया गया प्रेम
और उसी के
अथक प्रेम निवेदन
धुंध से लिखे हुए
पहाड़ों ने समेटे निवेदन
और धूप में सुखा दिए।
काला घाम वही है।
सारे सफेद चीड़
उम्मीद में रत प्रेमिकाएं हैं।
खूबसूरत
शोख
सदाबहार
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें