ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4338

भाषा / Language

अब जब तुम ही नहीं सुनोगे तो मैं कहां जाऊंगी

✦
अब जब तुम ही नहीं सुनोगे तो मैं कहां जाऊंगी... एक तुमको एक उसको ही तो पता है मेरे पास और कोई पता नहीं है। *बहुत देर तक ..... उँगलियों के बीच ..... कलम नचाते रहे कुछ .....सोच सोच मुस्कुराते रहे रोते रहे पर ..... कुछ लम्हे ..... लफ़्ज़ों में ना बंधे ...... तो बस..... ना ही बंधे ! इतना काफी है ..... या .....और लिखूं ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें