कल्पनाशब्दों के बीच
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अपने अंदर शोर थामे रखना भी एक हुनर है ।सबको ये करामाती सिक्…

अपने अंदर शोर थामे रखना भी एक हुनर है ।सबको ये करामाती सिक्का नहीं मिलता ।कोशिश कर के देखो किसी रोज़ .... शब्दों के समंदर में गोते लगाना ......सबको भिगाना पर अपने दामन में एक बूंद ना रिसने देना । अंतस के जलते शोर को शब्दों की नमी से आराम तो देना पर बुझने न देना। आसान नहीं है लिखना ।बिना राख हुए जलते रहना वो भी कागज़ पर ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें