कल्पनाशब्दों के बीच
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तुम्हारे माथे पर सलवटें उभर आई हैं ... उम्र दिखने लगी है तु…

तुम्हारे माथे पर सलवटें उभर आई हैं ... उम्र दिखने लगी है तुम्हारी कल्पना... उसने कहा सही तो है अबके जब तुम माथा चूमोगे तो चुम्बन सुलेख में छपेगा। महीन सलवटों के बीचों बीच सुंदर सुंदर लिखा हुआ। मैंने हंस कर सर उसके घुटनों पर रख दिया। वो क्या कहता.... रो दिया। अपना बना ले.... पिया * छुट्टी का दिन और यह गीत
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें