कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4309

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याद को कोई ब्लॉक कर पाए तो कहे।

याद को कोई ब्लॉक कर पाए तो कहे। फोन पर उंगलियां से खेलना और बात है। तुम blocked हो तुम्हारी बेरुखी.... तुम्हारी याद सब हर पल नोटिफाइड रह रहीं । परेशानी का सबब क्या बनना तुम्हारी प्रेम के लिए कोई खूंटा जरूरी तो नहीं। देखो उड़ गए अब हम। बेहद प्यारी गजल सुन रही... ये जान तो आनी जानी है इस जां की तो कोई बात नहीं। सुनिए...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें