कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4291

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ईश्वर ज़िद में रहता है।

ईश्वर ज़िद में रहता है। मैं तुम्हारी हंसती हुई तस्वीर से हर रोज थोड़ा प्रेम और करूंगी। तुम भी मुझे ना सुनने..... ना देखने का ढोंग करते रहना।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें