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वो मुझको लग रहा था प्यार मेरा

*वो मुझको लग रहा था प्यार मेरा वो जैसा लग रहा था वैसा था नहीं अभी इस पल जब मैं तुम्हें खुद में से आज़ाद कर रहीं हूं ... मैं वो सब भी भूल जाना चाहती हूं जो मुझे ताउम्र याद रखना चाहिए था। मैं अब भी तुम्हारे प्रेम में हूं ...बस ये बात अब मैं हंसते हुए नहीं कह रही। तुम पर मेरी हँसी नोच लेने का इल्ज़ाम रहेगा। *ये तोहफ़े हैं जो अपनों से मिले हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें