हम तुम चलता फिरता कब्रिस्तान हैं.... एक ज़िंदा मज़ार दुःख दबाते जाते हैं... फूल उगाते जाते हैं।
रचना 428315 मार्च 2023भाषा / Languageहिन्दीEnglishहम तुम चलता फिरता कब्रिस्तान हैं✦हम तुम चलता फिरता कब्रिस्तान हैं.... एक ज़िंदा मज़ार दुःख दबाते जाते हैं... फूल उगाते जाते हैं।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें