भाषा / Language
पिछले कई सालों से मैंने फोन पर ही लिखा और यहीं fb पर पोस्ट…
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पिछले कई सालों से मैंने फोन पर ही लिखा और यहीं fb पर पोस्ट कर दिया
कुछ संजोने... रखने का सोचा नहीं।
पुराना छूटने के साथ नया कुछ जुड़ जाता है आदतों में।
अब से ये सोचा है कि जो लिखूंगी लैपटॉप पर लिखूंगी। बचा रहेगा ।
छूटना भी सुंदर ही है। कोई नई जगह पहुंचूंगी।
ये ऐसा लिखना गजब है। एक कायदा मांगता है। थोड़ी देर में समझ आई पर खुश हूं कि ईश्वर ने इशारा किया।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें