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तुम तक पहुंचना क्या मुश्किल है

तुम तक पहुंचना क्या मुश्किल है ? दराज़ में रखी हंसी पहन कर बस आईने तक तो जाना है। Lazy Lamhe... Sunday Afternoon
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें