कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4274

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दुःख इस बात का तो है कि मन अस्त व्यस्त हो गया

दुःख इस बात का तो है कि मन अस्त व्यस्त हो गया ... पर सुख इस बात का भी है कि अभी बंजर नहीं हुआ । मैं इतने बवंडर में से भी तुमसे भरा प्रेम प्याला बचा लाई। और अब देख रही हूं कि अपना तोड़ आई। *तुम्हें बेखौफ लिख पाती हूं ..... मुझे मुहब्बत बस इतनी भर समझ आती है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें