भाषा / Language
दो ईश्वर एक साथ कैसे रखती
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*दो ईश्वर एक साथ कैसे रखती...
एक आँखों पर रहता है तो दूजा जुबां पर।
जगहें बदलती हैं पर ईश्वर और तुम नहीं बदलते।
*ये तस्वीर हमारी.... मेरे सुकून का रसीदी टिकट हैं......
मुझ तक मेरे आने का रास्ता
बिना रेल बिना सड़क
*ऐसी तस्वीर ऐसा हुस्न खुदा मुझको भी बक्शे...
जो आँखों पर दिखता रहे
जुबां पर छिपता रहे
*दायरे वाली बात थी...
एक बार तुमसे मिले
फिर तुमसे ही मिलने की हूक उठी...
रही...
और सदा कायम रहेगी।
पहली तस्वीर आखरी बार खींच ली ।
*सब्र की ही बात है....
रोज़ यही कहकर एक तस्वीर छेड़ती है मुझे
मैं भी फ़क़त जुमला कहकर चूम लेती हूँ उसे।
* ये तस्वीर पसंद आ गयी ।लगा उस पर लगी तस्वीर उस रोज़ वाली हमारी है।
तुम्हारी तस्वीर पर दिखना अच्छा नहीं पर लिखना अच्छा है ...
कहो नहीं पर मुस्कुरा तो दो 😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें