भाषा / Language
वो बुद्धिमान प्रेमी है मेरा
✦
वो बुद्धिमान प्रेमी है मेरा .....
प्रेम लौटाता नहीं
उपेक्षा कर देता है मेरी।
मूल नष्ट नहीं करता मेरा
फूल पत्तियां बेशक नोच देता है
*उसे हुनर है मेरी उदासियों को कान लगाकर सुन लेने का
वो हिचकियों में भेज सकता है स्पर्श।
वो गिन सकता है मेरे चेहरे की मुस्कान।
तोल सकता है मेरे दुःख।
उसे पता है जंगली फूलों को सहेजने की कला
वो जानता है व्याकुल हिरणी के पागल होने का समय
तभी चढ़ाए रखता है चुप्पी में बुझा तीर
उदासी की प्रत्यंचा पर।
अचूक निशाने पर प्रेमिल मैं
*मेरा व्याध ही मेरी व्याधि है
औषधि भी वही है।
मृत्यु तय है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें