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रचना 4211

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जितने भर तुम हो

जितने भर तुम हो .... उतनी भर जगह बाकी रहे मुझमें । मेरे नाम में। मेरी नज़र में । मेरी मुस्कान में। *कितना तो आसान है ये कहना कि तुम्हारी याद आती है। आप भी कहा कीजिए। जैसे मैं कह रही।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें