भाषा / Language
अब तलक जितना तुम्हें
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अब तलक जितना तुम्हें...
कहा गया और.......अनकहा भी
लिखा गया और..... अनलिखा भी
देखा गया और....... अनदेखा भी
बूझा गया और ........अनबूझा भी
छुआ गया और .......अनछुआ भी
जाना गया और...... अनजाना भी
सब मेरा है
और इतना ही और तुम्हारा मेरे लिए होना बाक़ी है ।
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कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें