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वो "कनेर का पीला फूल" मुझे इस लिए भी पसंद है क्योंकि वो गुल…

वो "कनेर का पीला फूल" मुझे इस लिए भी पसंद है क्योंकि वो गुलाब नहीं है । *जिंदगी के सबसे मीठे पल केसर होते हैं... कभी कभी पड़ने वाले बेहद महीन रेशे हद खुशबूदार ज़रा से में घुल जाने वाले आधी उम्र ख़र्च कर ली तो कुछ मुट्ठी भर दिन हाथ लगे और कुछ लोग जो ज़हन में साबुत थे । ए सुनो! हमने किर्चियाँ बटोरी क्या ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें