कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4182

भाषा / Language

तुम से तुम्हारी ही फ़रमाइश करती हूँ

तुम से तुम्हारी ही फ़रमाइश करती हूँ ... दीवानगी बेतुकी है तो क्या ? *तस्वीर कुछ देर पहले सुस्त धूप में बैठे बैठे ली है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें