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मेरे शहर में तुम्हारा सूरज नहीं पहुँचता

मेरे शहर में तुम्हारा सूरज नहीं पहुँचता और तुम्हारे शहर तक मेरी धूप भटक जाती है फिर भी चाँद कायम है ....इश्क़ अजूबा हुआ ना? *कैमरा कहां जब्त कर पाएगा तेरी खूबसूरती चांद ।मेरी आंखों में जज़्ब हो कर देख कभी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें