कल्पनाशब्दों के बीच
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मुझे भरे अवसाद में चुटकी भर बसंत मिलाना है

मुझे भरे अवसाद में चुटकी भर बसंत मिलाना है.... मेरा पैमाना अलग मेरा नीम नशा भी *बसंत खुद खिलने में कहां तुम्हारी आंखों में खुद को खिलता हुआ देखने में है *बसंत सांझा करने में है तुम्हारे दुःख *बसंत तुम्हारी चुप्पियों से खुद को पीतवर्णा कर लेने में है । *बसंत तुमको मोह लेने में है *बसंत बस तुमसा तुममें तुम्हारे लिए हो जाने में है। तुम्हें मैं मुबारक मुझे तुम्हारा बसंत
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें