भाषा / Language
तुम प्रेम हो.... तुम प्रीत हो।
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तुम प्रेम हो.... तुम प्रीत हो।
वो दोनों जब भी मिले ....गले मिले ।
सोचा स्पर्श से इतने दिनों की जमी काई चुटकी में सूख जाएगी। पर हुआ उलट ।उसके सीने से लगते ही पिछले कुछ बरस से ना मिलने से बन गई गिरहें लड़की की आंखों से झर झर बहने लगी। दोनों की साल भर से जमा चुप्पियां बर्फ़ हो गईं। लड़के की भी तालू से जीभ चिपक गई हो जैसे।
दोनों की चुप्पी जब पल भर नेह की गरमाईश में पिघली तो लड़की बस इतना ही कह पाई ....कैसे हैं आप ।
लड़का भी इतना ही कह पाया... सब अच्छा ।आप कहें।
सिंफनी जानते हैं ...
सब कुछ rhthmic हो जाता है ।ठीक उसी समय दोनों को लगा कि दोनों अनायास rhythmic हो गए। एक साथ मुस्कुराए, एक साथ नजरें उठी, एक साथ हाथ बढ़े , एक साथ हथेलियां जुड़ी और एक साथ कदम आगे बढ़ गए।
चुप्पी और झिझक साथ साथ डग भर रहे हों तो धड़कनें आसपास के शोर को भी मात दे देती हैं। ठंडी हथेलियों में स्नेहिल स्पर्श का गरम पारा पड़ रहा हो तो लगता है क्या ही कहो और क्या ही सुनो।बस रूमानी शाम चलती रहे।
तुम और सुंदर हो गई हो ..लड़के ने कहा
और तुम और पुराने मुझमें.... लड़की धीरे से बोली।
पुराने ? ...सही कहा
पचास पार पुराने ही होते हैं । लड़के ने हंसते हुए कहा ।
जी नहीं ...पुराने मुझमें यानि और रिस गए हो इसलिए मैं सुंदर हो गई हूं। बीते कई बरसों में मिलना न हुआ तो तुम्हारी याद शहद हो गई है । वही मिठास तुम्हें खूबसूरत लग रही होगी।
लड़की ने कहा।
तुम बातें और भी अच्छी बनाने लगी हो। लड़के ने कहा।
हां तो इतने बरस तुम साथ न थे तो क्या करती। लिखने लगी। खुद से एकांत में बोलते रही तो रूमान बरसने ही लगता है। कहीं तो पड़ेगी ही उदासी की बर्फ़। लड़की ने अपने बैग में कुछ टटोलते हुए कहा।
उदासी की बर्फ़.... अच्छा है। तभी मैं सोचूं कौन मुझे हिचकी लगाता था रोज़ रोज़ । याद के नाम पर दस्तक देना सुंदर था तुम्हारा। लड़के ने शरारत के पासे हवा में बिखेर दिए।
याद उनको किया जाता है जो भुलावे में रखे जा सकें । तुमको तो जेहन में रख लिया है। अब कोई राह नहीं उड़ जाने की। कैद में रहे ये बुलबुल। लड़की ने शरारत के पासे लपके और अपनी मुठ्ठी में कैद कर लिए।
ओहो बुलबुल...
तभी मैं कहूं ... तुम वही चिड़िया हो न जो मेरे आंगन के पेड़ों में छुप छुप कर मुझे देखती रहती थी। फुदकती रहती थी। लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा।
हां तो देखने का कोई टैक्स थोड़े ही लगता है। लड़की ने मुस्कान लौटाते हुए कहा।
कुछ लाई हूं तुम्हारे लिए ।वैसे तो इतने दिन न मिल पाने का हर्जाना तुमसे लेना था पर जाने दो। लड़की ने कहा
लड़की ने एक छोटा सा बॉक्स निकाल कर लड़के के हाथ में रख दिया जिसपर एक मोरपंख लगा हुआ था।
इसे घर जाकर खोलना।
लड़की ने अपना हाथ लड़के के सीने पर रख कर कहा। इसमें मेरी रूह बंद है।
तुम्हारी प्रीत का भी कोई जवाब नहीं.... लड़के ने कहा।मुझे कितना कुछ सीखना है तुमसे।
जैसे? लड़की ने आश्चर्य से पूछा।
जैसे तुम रत्ती भर न बदली।
तुम वही खड़ी हो बरसों से जहां मुझे पहले रोज मिली थी।
तुमने ज़िद्द की डोर कभी नहीं छोड़ी न धैर्य की।
तुम हंसते हुए रोई और रोते हुए भी हंसती रही।
कितना तो दुखाया है मैंने तुमको
कितना इंतज़ार दिया ।
तुम रुकी रहीं। जीवन को इतने दिनों में जितना सुंदर तुमने गढ़ा कोई शायद ही पिरो पाता इतना प्रेमिल रूप। लड़का कहते कहते भावुक हो गया।
लड़की समझ गई कि बांध टूटने वाला है । झट बोली ..... एक कविता ही सुना दें । इतनी रूमानी शाम सजा रखी है आपके लिए। फिर ये मंजर हो न हो। शायद हम अकेले फिर कभी ना मिलें।
बस इतना भर ही चाहती हो तुम मुझसे ... लड़के ने लड़की का हाथ कसकर पकड़ते हुए कहा।
अपनी पसंदीदा किताब के कुछ पन्ने उस शाम लड़के ने सिर्फ़ लड़की के लिए पढ़े और किताब के आखरी पन्ने पर शुक्रिया से पहले कुछ लिख कर दिया।
*मैं तुम्हें तुम्हारे हिस्से का कभी कुछ दे ना पाऊं। पर तुमको ये कह सकता हूं कि
तुम में एक खूबसूरत स्त्री होने के अतिरिक्त और कितना कुछ है जिसके लिए तुम्हें प्रेम किया जा सकता है। तुम्हारा हृदय बस मेरा रहे।*
तुम रहना सदा।
शुक्रिया।
लड़की इन पंक्तियों को पढ़ते पढ़ते डैंडेलियन का फूल हो गई । उसे लगा लड़का उसे फूंक मार मार कर उड़ा रहा और वो रेशा रेशा लड़के के बदन पर चिपकती जा रही।
अचानक हवा रुक गई। लड़की गंध से भर गई और लड़का नेह से।
भरे लोग छलकते नहीं।
दूर कहीं मंदिर से सुर लुढ़कते लुढ़कते हुए दोनों के बीच पसर गए
तुम प्रेम हो...
तुम प्रीत हो
मनमीत हो ... राधे
मेरी मनमीत हो।
दोनों के बीच ईश्वर बिंध गया।
* हेडफोन पर यह गीत सुनते सुनते शाम गुजर गई। उंगलियां चलती रहीं।
गीत सुनिए जरूर।
शुक्रिया।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें