भाषा / Language
लिखना मेरे लिए बारह मासी बसंत है।
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लिखना मेरे लिए बारह मासी बसंत है।
कविता के फूल मुझमें लदे रहते हैं।
मुझमें ही सूख जाते हैं।
गिर जाते हैं मुझमें ही
फिर उग जाने के लिए।
अक्षर वाला बसंत मुरझाकर खिले या खिलकर मुरझाए ...
कल्पना का होना तय है।
तुमको भी बसंत मुबारक ....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें