कल्पनाशब्दों के बीच
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ढब

ढब ..... आखरी में नाम देकर हम अपने लिखे को चेहरा भी दे देते हैं..…. जबकि लिखा ऐसा हो कि जिसमें चेहरे असंख्य रहें और नाम ना मालूम रहे। प्रेम ,प्रेमी, दुःख,सुख,उजास ,उदासी सब बिना चेहरे के शब्द हैं पर सब पर फबते हैं । लिखा हुआ भी चेहरा हो.... नाम नहीं
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें