कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4109

भाषा / Language

अबके "लोग क्या कहेंगे" वाला घूँघट

अबके "लोग क्या कहेंगे" वाला घूँघट नहीं खरीदा अपने लिए । आज "मैं क्या सोचती हूँ " वाली चूनरी ओढ़ लायी हूँ अकेली हूँ पर महफ़ूज़ हूँ । *तस्वीर देख कर आया ख्याल
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें