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प्रेम की भुजाएँ तो होती हैं पर पैर नहीं होते।

प्रेम की भुजाएँ तो होती हैं पर पैर नहीं होते। जाते हुए .....प्रेम उड़ जाता है स्त्री मन से *तस्वीर में मैं हूं । और अगर मैं हूं तो तुम्हारा होना तो लाज़िमी है। कोई मुझे देखे तुमको देखते हुए .... *आखरी छुट्टी कट रही..गाते मुस्कुराते
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें