भाषा / Language
प्रेम में मैंने तुम्हें बस प्रेम करने का हक़ दिया है...उदास…
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प्रेम में मैंने तुम्हें बस प्रेम करने का हक़ दिया है...उदासी से नवाजने का नहीं.....
दरख़्त को टूटती पत्ती ने टुकुर टुकुर देखते हुए कहा। फिर कुछ देर हवा में लहराकर मिट्टी पर पड़ गई ।
मिट्टी वाला मौसम याद है?
पत्ती ने पहला संवाद दरख़्त की तरफ उछाल कर कहा।
दरख़्त निर्मोही है।
मैं झल्ली
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें