कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4066

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आवाज़ दूंगी तो पहाड़ों को दूंगी ।

आवाज़ दूंगी तो पहाड़ों को दूंगी । दीवार तुमको को क्यों दूंगी? तुमको तो प्रेम दूंगी । रखो दिल..
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें