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एक रोज़ लड़की ने लड़के से कहा

एक रोज़ लड़की ने लड़के से कहा... मैं एक कविता हूँ जिसके लिए तुम्हारे पास कागज़ नहीं था। लड़के ने हमेशा की तरह लड़की को छोड़ ख़ामोशी को चुना। फिर लड़के ने इस खामोश वाकये को जाने कितनी ही बार कहानी में लिखा पर वो उस कविता को कागज़ पर नहीं उतार पाया जो लड़की उसकी रूह पर लिख आयी थी। प्रेम एक ऐसा ही दाग है जो रूह को दिया जाता है। मैंने हमेशा से एक ऐसे ही दाग का स्वप्न बुना है। तुमको देखते हुए अक्सर ये ख़्याल आता है कि खुद से कई कागज़ फाड़ कर उड़ाते हुए मैंने तुमको लिखते हुए खुद को आज़ाद किया है। रूह से बड़ा कागज़ क्या होगा। निराशा से भरी कलम में प्रेम के अलावा क्या भरा जा सकता है.... जो सालता है , चुभता है वही लिखा जा सकता है। जो लिखा जा सकता है वो रूह की बात है। रूह के रुहानी कोनों में आप चेहरा और काया नहीं बांध सकते। वह एक सयानी शै है। रूह में बस रूह को अंदर आने की इजाजत है। तुम आ सकते हो मुझमें बिना चेहरे बिना काया जिंदगी की पीड़ा में इश्क़ तुमको खुश- आमदीद। आओ ।तुमको चुना है मैंने।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें