कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 4006

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ये जो मेरे

ये जो मेरे ..... ग़ुम ग़ुम .... खोये खोये.... अधूरे अधूरे..... हिस्से हैं वो सुकून कायम रखने के लिए रख आयी हूँ तुम पर अधूरी मैं भी नहीं .... पूरे तुम भी नहीं एक शब्द का बसंत हूं... पुकार कर देखिए।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें