ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 4005

भाषा / Language

मन बाज़ है

✦
मन बाज़ है और बाज़ बाज नहीं आता। प्रिय... इस धरती पर कितने तो प्यारे लोग हैं.... प्रेम तुम पर रुका है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें