भाषा / Language
उदासियाँ लिखने के लिए एक मुंशी रख लिया है
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*उदासियाँ लिखने के लिए एक मुंशी रख लिया है....
प्यार से मैं उसे चाँद बुलाती हूँ
*रात रखने के लिए सकोरा चाहिए था....
ज्यादा इतराओ मत चाँद
*दो हिस्सों में बंट कर क्या होगा?
आधा आधा तो तब भी नहीं होगा।
*एक रोज़ तुम मुझसे मुझसा होकर मिलना....
कितना हो मुझमें?
अपना हिसाब खुद नहीं रख पाओगे।
*लिफ़ाफ़े में उदासी पूरी भर ही नहीं रही थी।
स्माइली से चिपका कर भेज रहीं हूँ।
*जब भी ईश्वर से बात करती हूँ....
तुम्हारी ही शिकायत करती हूँ कि तुम कितना कम कम रहा करते हो मेरे लिए...
ईश्वर मेरे झूठ पर बस मुस्कुराता रहता है।
*मेरी उदासी का हिस्सा वो कभी नहीं बन सकता....
हाँ ....वजह हो सकता है।
*चढ़ते सूरज को सलाम करना मेरी आदत नहीं....
मैं उस टूटी डोंगी की उदासी खुरचना चाहूँगी ।
उस पर जुगनू के पर्याय वाची काढ़ना चाहूँगी।
*मेरे लिए लिखना यानि छूना ही है।
*मैं इश्क़ में हूँ...
किस से?
इस जवाब से हर कोई रूठ जाएगा।
जाने देते हैं....
एक रोज़ मैंने ईश्वर से कान में कहा ।
अब रोज़ कहती हूँ।
शुभ रात💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें