कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3943

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चुप रहते हो तो अक्षर भी मुचडे से लगते हैं ।

चुप रहते हो तो अक्षर भी मुचडे से लगते हैं । बोल लेते हो तो रेशमी बातों पर इस्त्री हो जाती है। नज़्म तैरती है ... किस्सों पर टांके लगते जाते हैं। एक कहानी सुनहरी किनारे वाला दुपट्टा ओढ़ लेती है। तुम कहा करो। *लिखे के साथ कुछ भी कहां मेल खाता है। तस्वीर पंद्रह साल पुरानी हॉलैंड यात्रा के समय की है ।संजोया कुछ भी हो प्यारा लगने लगता है...फिर चाहे वो प्रेम हो या अप्रेम
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें