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पहाड़ों में करवाचौथ का प्रचलन नहीं था पर अब नई दुल्हनें इसे…

पहाड़ों में करवाचौथ का प्रचलन नहीं था पर अब नई दुल्हनें इसे पहाड़ों तक ले आई हैं। पुरानी परंपराओं में नई लड़ियां लगने लगी हैं। पहाड़ों में वट सावित्री मनाया जाता है। हमेशा से वही मनाया है । पर्व किसी को मान देने या सलामती की दुआ का हो तो विशेष हो जाता है। आप सभी सखियों को सुहाग मुबारक। पुरुष मित्रों को उनकी भाग्यवान मुबारक। साथ बना रहे। रंग ,सुकून,प्रेम सदा रहे। करवाचौथ मुबारक।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें