कल्पनाशब्दों के बीच
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देह और मन को तराजू पर रखो तो मन हल्का ही होता है ।

देह और मन को तराजू पर रखो तो मन हल्का ही होता है । याद रहे.... उसको हल्के में ना लेना। देह तो एक पल को बैठ भी जाए.... चट से। मन बिठाने में ज़माने लगते हैं। और बहुत सारा आत्म सम्मान
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें