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हम दुनिया को अलग अलग नज़र से देखते हैं

हम दुनिया को अलग अलग नज़र से देखते हैं .... दुनिया हमको देखते हुए देखती है। *प्रेम इतना निश्चल हो कि... जो है वो कह सके। जो मन हो वो मांग सके। और जो चुभे तो चुप रह सके। तस्वीर में मेरे साथ सुंदर बाल मन है ...उसकी प्रेमिल कृति है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें