कल्पनाशब्दों के बीच
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पीड़ा को लिखो

पीड़ा को लिखो.... पर पीड़ा में बने रह कर मत लिखो । लिखने और खिलने में मात्र अक्षर का हेरफेर नहीं एक रिसाव भी है आत्मा का रिसाव आत्म का बचाव पीड़ को पीर कभी न कहना! Release pain of love Just be in love 💕
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें