भाषा / Language
ईश्वर उसी में ठहरता है जो उसे संभाल पाता है।
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*ईश्वर उसी में ठहरता है जो उसे संभाल पाता है।
ठीक जैसे प्रेम
प्रेम पाना ईश्वर सा है पर संभालना ईश्वरीय सा....
ईश्वर और प्रेम क्रमश: रहें।
*प्रार्थना में प्रश्न उग ही नहीं सकते।
प्रेम एक लंबी अथक प्रार्थना है...
मनबध्द और देहबद्ध होने के मध्य का मुक्तिबद्ध
तुम मेरे लिए कहां हो प्रेम ?
*प्रेम को प्रेम नहीं उसकी नम्रता सींचती है। मैं तुम्हारी नम्रता होना चाहती हूं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें