भाषा / Language
स्त्री यकीन कभी नहीं देती.....एक कसौटी पर रखती है खुद को और…
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स्त्री यकीन कभी नहीं देती.....एक कसौटी पर रखती है खुद को और पुरुष को।
जीत जाए तो ठीक
हार जाए तो भी हारती नहीं।☺️
पारस जानते हो
फ़र्क जानने के लिए प्रयोग होता है। स्त्री वही है।
मैं भी वही हूं...
ठीक वही
तुम्हारे लिए।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें